
चंबा। गरीब मरीजों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध करवाने के लिए खोले गए जन औषधि केंद्र में पिछले पांच माह से ताला लटका हुआ है। इससे मरीजों को मजबूरन बाजार से महंगी दरों पर दवाईयां लेनी पड़ रही हैं। जन औषधि केंद्र दिसंबर माह के अंत से ही बंद पड़ा हुआ है। जिला स्वास्थ्य विभाग जनऔषधि केंद्र को खोलने में नाकाम साबित हो रहा है। विभाग के कोशिशों के बावजूद भी केंद्र खुल नहीं पाया है। इससे अस्पताल में उपचाराधीन मरीजों सहित तीमारदारों में अस्पताल प्रशासन के प्रति रोष पनपना शुरू हो गया है। अस्पताल प्रबंधन कई बार जन औषधि केंद्र को खोलने के दावे करता आ रहा है। इसके बाद भी ताले में कैद जन औषधि केंद्र आजाद नहीं हो पाया है
इस केंद्र को फेल करने के लिए खुद ही स्वास्थ्य विभाग व जिला अस्पताल प्रशासन को जिम्मेवार माना जाता है। जहां विभाग ने जिला के सभी अस्पतालों के लिए यहां से दवाई की सप्लाई की व्यवस्था नहीं करवाई। वहीं जिला अस्पताल ने तो यहां से महज कुछ सौ रुपए की दवा ही खरीदी थी। डाक्टरों ने तो यहां से दवाएं लिखने की जहमत ही नहीं उठाई थी। इसी उपेक्षा के चलते वह इसे छोड़ कर चला गया था। कोई फार्मासिस्ट यहां तैनात होने का जोखिम नहीं उठा रहा है। गरीब तबके से संबंध रखने वाले मरीजों की जेबें बाजारों से महंगी दवाइयां खरीदने से खाली हो रही हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग के ध्यान में यह बात कई बार मरीजों के तीमारदारों द्वारा लाई भी जा चुकी है। इसके बाद भी स्थिति जस की की तस बनी हुई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. राकेश वर्मा का कहना है कि जन औषधि केंद्र को खोलने के अस्पताल प्रबंधन प्रयासरत है। केंद्र को खोलने के लिए अच्छा कांट्रेक्टर ढूंढा जा रहा है। जल्द ही जन औषधि केंद्र लोगों की सुविधा के लिए खोल दिया जाएगा।
